पीजीपी प्रशंसापत्र

पीजीपी प्रशंसापत्र

पीजीपी प्रशंसापत्र

भारत तुर्लापति

भारत तुर्लापति

The unique and distinctive proposition of learning at IIM Nagpur through collective discourse providing both theoretical concept clarity and application-oriented methodology has helped me in understanding the management concepts in a more effective way. We had the opportunity to learn through the extremely interactive and engaging lectures from the in-house faculty and visiting professors with both industrial experience and academic experience. In addition to the academics, it is the podium that IIM Nagpur has given me for the development of my leadership skills that I would cherish for lifetime.
Priyank Pawar

Priyank Pawar

I am grateful to IIM Nagpur for helping me unleash my worth in these 2 years as a memorable experience. I witness myself that though the time runs really fast but no one finishes last as learning never slows down. Course curriculum & club activities have provided me a platform to work with my peers coming from a diverse range of backgrounds, interests and talents, thereby equipping me with skills required for succeeding in cross-cultural environments in my career ahead.
रजत गोयल

रजत गोयल

The journey at IIM Nagpur has been a roller coaster ride where you have so much to do in such a short time. Be it games, academics, extra/co-curriculars, placements, batch meets, club events, late-night submissions you feel like giving 100% and implement your learning. The quality of teaching, infrastructure, staff and overall learning experience is the best in class. An enormous number of tests, assignments, quizzes, projects focussing on practical learning and still you are able to party hard. The atmosphere is so energetic that you never run out of energy. The best Institute & best part of my life. Thank you, IIM Nagpur, for everything!
सौमित मिश्रा

सौमित मिश्रा

(बैच 2015-17)

किसी के जीवन में बहुत कम क्षण ऐसे होते हैं जब कोई वास्तव में भाग्यशाली महसूस करता है। मेरे जीवन में ऐसा एक क्षण तब आया जब मैं भा.प्र.सं. नागपुर में अपने पहले बैच के सदस्य के रूप में शामिल हुआ। भा.प्र.सं. नागपुर में बिताए गए समय ने मुझे प्रबंधन, नेटवर्किंग, दोस्त बनाने, जीवन जीने का सही तरीका और सबसे महत्वपूर्ण बात पूछते रहने और सीखते रहने की आदत, मेरे अंदर के जिज्ञासु कीड़े को मैं कभी मरने नहीं दूंगा। मैं हमेशा भा.प्र.सं. नागपुर और मेरे जीवन के इस गौरवशाली हिस्से से जुड़े सभी लोगों का आभारी रहूंगा।"
विक्रम खन्ना

विक्रम खन्ना

(बैच 2016-18)

मेरे लिए भा.प्र.सं. नागपुर सिर्फ एक स्नातक संस्थान नहीं है जहाँ से मैंने स्नातक किया। बल्कि यह एक स्टार्टअप की तरह है जिसे समर्पित संस्थापकों के समूह की आवश्यकता है, और पहली कुछ बैचों को ही ऐसा होने का मौका मिलता है। मैं वास्तव में भाग्यशाली था कि इसके संस्थापकों में से एक बना!! अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण वर्षों में से दो भा.प्र.सं. नागपुर में बिताने के बाद, मैं कह सकता हूं कि इसके उत्पाद बहुत अच्छे हैं और संस्थान कुछ ही समय में अपनी पहचान बना लेगा। बैच को मेरी शुभकामनाएं और भा.प्र.सं. नागपुर की सफलता की कहानी का हिस्सा बनने वाले सभी लोगों को बधाई।
सौम्या रंजीत

सौम्या रंजीत

(बैच 2016-18)

(बैच 2016-18) भा.प्र.सं. नागपुर जैसे बढ़ते बी-स्कूल का हिस्सा होने के नाते, हमने अद्भुत प्राध्यापकों के समूह से न केवल प्रबंधन के 'फंडा' सीखे, बल्कि हम में से प्रत्येक इसकी विकास कहानी का हिस्सा भी बन गया है। यह उल्लेख करना बहुत महत्वपूर्ण है कि संस्थान का संपूर्ण प्रशासन और संकाय हमेशा विद्यार्थी निकाय को संस्थान को आकार देने के कार्य में शामिल करता था, भले ही संस्थान का ध्येय और लक्ष्य निर्धारण हो, या इसे नियंत्रित करने वाली नीतियों का निर्माण, आदि। मुझे लगता है कि भा.प्र.सं. नागपुर ने हमें संबंध और स्वामित्व की भावना दी है। चाहे वह इसका प्रथम उद्योग शिखर सम्मेलन हो, टेडेक्स टॉक या अन्य  कई कार्यक्रम  और प्रतियोगिताओं का आयोजन, इसने हमारे संगठन निर्माण और नेतृत्व कौशल का उपयोग करने और इशे पोषित करने में मदद की है। जैसा कि कहा जाता है, सबसे अच्छी शिक्षा काम के दौरान ही प्राप्त होती है, भा.प्र.सं. नागपुर ने मुझे व्यक्तिगत रूप और, मुझे यकीन है कि, हम में से प्रत्येक को इस प्रतिष्ठित संस्थान का हिस्सा बनने का मौका देकर वही अनुभव प्रदान किया है।
के. राधा कृष्णा वर्मा

के. राधा कृष्णा वर्मा

(बैच 2017-19)

जब मेरा जीवन भ्रम की स्थिति में था, भा.प्र.सं. नागपुर ने मेरे करियर को रास्ता दिखाया और खुद को तलाशने और कई अनुत्तरित सवालों के समाधान खोजने के लिए एक मंच प्रदान किया है। यह मुझे सिखाया कि विकास का अर्थ सिर्फ ‘मैं’ का विकास नहीं है बल्कि पूरी तरह से 'हम' का विकास है। कुछ बी-स्कूलों में से एक के साथ जुड़े होने की खुशी है जो कॉर्पोरेट और सामाजिक विकास दोनों क्षेत्रों के लिए समान महत्व देता है और इस तरह एक प्रीमियम बी-स्कूल बन रहा है जो "समाज को वापस देने" के आदर्श वाक्य के साथ काम कर रहा है। भा.प्र.सं. नागपुर में बिताए गए समय को मैं जीवन भर सराहता रहूंगा और मैं हमेशा इसके लिए आभारी रहूंगा। आशा है कि इसके निर्धारित और अनुशासित प्रयासों के साथ यह खुद को उत्कृष्टता के एक विशिष्ट संस्थान के रूप में स्थापित करेगा जो आने वाले दिनों में कई लोगों के जीवन को बदलने के लिए काम कर रहा है।
साई अनुशा मामायला

साई अनुशा मामायला

(बैच 2017-19)

कभी भी घर से दूर नहीं रहने वाला एक फ्रेशर,  भा.प्र.सं. नागपुर ने मुझे अपने कंफर्ट-झोन से बाहर निकाला और मुझे विविध पृष्ठभूमि और विभिन्न उद्योग विशेषज्ञ लोगों के साथ मिलने का अवसर दिया।इस संस्थान को हमेशा याद किया जाएगा, सिर्फ इसलिए नहीं कि मैंने यहाँ 2 साल अध्ययन किया था, बल्कि उन यादों और अनुभवों के लिए भी जो इसने मुझे जीवन भर के लिए एक खजाना के रूप में दिया है।
अंकुर बैनर्जी

अंकुर बैनर्जी

(बैच 2017-19)

संदेह से आशावाद तक की यात्रा। हाँ, किसी अन्य प्रतिभागी की तरह, मैं इस नए भा.प्र.सं. में शामिल होने के बारे में संदिग्ध था। कई अन्य विद्यार्थियों की तरह, मैं साथियों की गुणवत्ता से अभिभूत था। कुछ ऐसे लोगों की तरह जो मुझे बदलना चाहते थे, शायद माहौल के अनुरूप ढलने में या दौड़ में आगे निकलने का एक तरीका ढूंढने के लिए। मुझे नहीं पता कि वो क्या था जिसने मुझे अपने साथ इस स्कूल को भी आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया था। शायद केस स्टडी में सुनी गई स्टार्टअप की सफलता की कहानियां। स्टार्टअप सफल होने में क्या संदेह हो सकता है जब आपके पास देश के सर्वश्रेष्ठ सलाहकार मौजूद हों, आपके पा समर्पित साथी हों और आपके दोस्त सबसे प्रेरणादायक हों? इस महान चरण का शुक्रिया करना कृतज्ञता का एक अंश मात्र है। असली कृतज्ञता वह होगी कि मैं भविष्य में क्या बतनता हूँ या भविष्य में इसके लिए मैं क्या करता हूँ।