प्रो. दीपार्घ्य मुखर्जी का शोध पत्र, जिसका शीर्षक ‘मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड?—भारतीय परिवहन उपकरण क्षेत्र पर औद्योगिक और व्यापार नीति के प्रभावों का एक अध्ययन’ है, ‘जर्नल ऑफ सोशल एंड इकोनॉमिक डेवलपमेंट’ में प्रकाशित हुआ है। यह शोध वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (GVCs) के माध्यम से व्यापार की दुनिया में, विभिन्न क्षेत्रों की निर्यात क्षमता पर औद्योगिक और व्यापार नीतियों के मिले-जुले प्रभावों की पड़ताल करता है। भारत के मोटर वाहन और परिवहन उपकरण क्षेत्रों पर 2016 से 2020 के बीच कई सरकारी नीतियों—जैसे (a) FAME 1, (2) GST, और (3) मध्यवर्ती वस्तुओं (intermediates) पर शुल्क (tariff duties) में वृद्धि—का गहरा असर पड़ा है। शोध से पता चलता है कि इन सरकारी हस्तक्षेपों का, मध्यवर्ती वस्तुओं और अंतिम उत्पादों के व्यापार के आधार पर, भारत के परिवहन उपकरण क्षेत्र के निर्यात और आयात पर अलग-अलग प्रभाव पड़ सकता है। यह शोध विदेशी अंतिम मांग (foreign final demand) में भारत के योगदान पर इन नीतियों के प्रभावों को भी उजागर करता है, साथ ही इन नीतियों के संदर्भ में FTA (मुक्त व्यापार समझौता) साझेदारों के साथ व्यापार पर पड़ने वाले विशेष प्रभावों का भी विश्लेषण करता है।
