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प्रो. सोम शेखर भट्टाचार्य का सह-लिखित शोध पत्र, जिसका शीर्षक ‘एक्सप्लिकेटिंग द फैक्टर्स इन्फ्लुएंसिंग सक्सेसफुल इम्प्लीमेंटेशन एंड मैनेजमेंट ऑफ सस्टेनेबल इनोवेशन प्रैक्टिसेज इन रिसर्च-इंटेंसिव ऑर्गेनाइजेशंस’ है, ‘एमराल्ड इनसाइट जर्नल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पॉलिसी मैनेजमेंट’ में प्रकाशित हुआ है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट नागपुर के स्ट्रेटेजी और एंटरप्रेन्योरशिप विभाग के प्रो. भुवनेश्वर सुब्रमण्यन इसके सह-लेखक हैं। यह अध्ययन उन कारकों की पहचान करता है जो लाइफ साइंसेज उद्योग सहित रिसर्च-इंटेंसिव (शोध-प्रधान) क्षेत्रों में सस्टेनेबल इनोवेशन (सतत नवाचार) को सफलतापूर्वक लागू करने और प्रबंधित करने में योगदान देते हैं। इस शोध को करने के लिए दो विधियों का उपयोग किया गया। पहली विधि में लाइफ साइंसेज उद्योग के 21 सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों और नेताओं के गुणात्मक साक्षात्कार (qualitative interviews) शामिल थे, जो सस्टेनेबिलिटी इनोवेशन को लागू करने के लिए जिम्मेदार हैं। इन लोगों का चयन ‘नॉन-प्रोबेबिलिस्टिक पर्पसिव सैंपलिंग’ (गैर-संभाव्यता उद्देश्यपूर्ण नमूनाकरण) के जरिए किया गया था। दूसरी विधि में MAXQDA सॉफ्टवेयर का उपयोग करके ‘थीमैटिक कंटेंट एनालिसिस’ (विषयगत सामग्री विश्लेषण) किया गया। इस शोध में रिसर्च-इंटेंसिव फर्मों में सस्टेनेबल इनोवेशन के सफल कार्यान्वयन की पहचान की गई है। इसकी शुरुआत सस्टेनेबिलिटी के लिए एग्जीक्यूटिव विजन (कार्यकारी दृष्टिकोण) को फर्म के व्यावसायिक उद्देश्यों के साथ संरेखित (align) करने से होती है। सस्टेनेबिलिटी प्रथाओं को लागू करना, संगठनात्मक पुनर्गठन (organizational reconfiguration) का एक हिस्सा है। यह फर्म के आंतरिक संसाधनों और बाहरी हितधारकों के बीच विचारों और ज्ञान के उद्देश्यपूर्ण आदान-प्रदान को सुगम बनाता है, जो पूरी तरह से उस रिसर्च-इंटेंसिव फर्म के उद्देश्यों पर आधारित होता है।