प्रो. निकुंज कुमार जैन का सह-लिखित शोध पत्र, जिसका शीर्षक 'एक्सप्लोरिंग द डायरेक्ट इम्पैक्ट ऑफ एनवायर्नमेंटल, सोशल एंड गवर्नेंस (ESG) फैक्टर्स ऑन ऑर्गेनाइजेशनल इनोवेशन आउटपुट एंड इंस्टीट्यूशनल आइसोमोर्फिज्म: अ स्टडी इन द कॉन्टेक्स्ट ऑफ मल्टीनेशनल लाइफ साइंसेज ऑर्गेनाइजेशंस' है, 'एमराल्ड इनसाइट बेंचमार्किंग: एन इंटरनेशनल जर्नल' में प्रकाशित हुआ है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट नागपुर के 'स्ट्रेटेजी एंड एंटरप्रेन्योरशिप' विभाग के प्रो. सोम शेखर भट्टाचार्य और एग्जीक्यूटिव PhD स्कॉलर श्री भुवनेश्वर सुब्रमण्यन, इस शोध पत्र के सह-लेखक हैं।
यह शोध, मल्टीनेशनल लाइफ साइंसेज कंपनियों में 'एनवायर्नमेंटल, सोशल एंड गवर्नेंस' (ESG) कारकों के संभावित प्रत्यक्ष प्रभाव और 'आइसोमोर्फिक' (समरूपता लाने वाले) कारकों के रूप में उनकी भूमिका की जांच करता है। शोधकर्ताओं ने 86 मल्टीनेशनल लाइफ साइंसेज कंपनियों के सैंपल पर 'नेसेसरी कंडीशन एनालिसिस' (NCA) का उपयोग किया। इसके लिए उन्होंने 'R' स्टैटिस्टिकल टूल की मदद से यह पता लगाया कि पर्यावरण (E), सामाजिक (S), गवर्नेंस (G) और संयुक्त ESG कारकों का इनोवेशन (जिसे रिसर्च एंड डेवलपमेंट - R&D खर्च के रूप में मापा गया है) पर क्या सीधा प्रभाव पड़ता है। इस शोध से यह स्पष्ट हुआ कि लाइफ साइंसेज उद्योग की मल्टीनेशनल कंपनियों के इनोवेशन आउटपुट पर ESG कारकों का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही, यह भी पता चला कि ये ESG कारक, मल्टीनेशनल लाइफ साइंसेज कंपनियों में सस्टेनेबिलिटी (स्थिरता) से जुड़ी प्रथाओं को लागू करने के दौरान 'आइसोमोर्फिक' कारकों के रूप में कार्य करते हैं।
