आईआईएम नागपुर और ओएनजीसी ग्रीन के बीच समझौता ज्ञापन

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आईआईएम नागपुर और ओएनजीसी ग्रीन के बीच समझौता ज्ञापनदिसम्बर 23, 2025

आईआईएम नागपुर और ओएनजीसी ग्रीन के बीच समझौता ज्ञापन

नागपुर:

स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल ऊर्जा के माध्यम से भारत ने वर्ष 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए कोयला आधारित ऊर्जा पर निर्भरता कम करना आवश्यक है। इसी दिशा में वर्ष 2030 तक 10 गीगावॉट हरित ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति के लिए अब भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) नागपुर और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (ओएनजीसी) मिलकर कार्य करेंगे।

आईआईएम नागपुर और ओएनजीसी ग्रीन लिमिटेड के बीच 20 दिसंबर को एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के तहत हरित एवं भविष्य की ऊर्जा के क्षेत्र में अनुसंधान, क्षमता निर्माण और नीति-आधारित पहलों पर संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा।

समझौता ज्ञापन पर आईआईएम नागपुर की ओर से निदेशक श्री भिमराया मेत्री ने तथा ओएनजीसी ग्रीन लिमिटेड की ओर से मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री हर्षनूपुर जोशी ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर आईआईएम नागपुर के वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. आलोक कुमार सिंह (डीन – एक्ज़ीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम्स) और प्रो. निकुंज कुमार जैन (एक्ज़ीक्यूटिव एमबीए इन एनर्जी मैनेजमेंट के अध्यक्ष) उपस्थित रहे। ओएनजीसी की ओर से दीपक कुमार, महाप्रबंधक (इलेक्ट्रिकल) भी कार्यक्रम में शामिल हुए।

इस अवसर पर जोशी ने कहा, “ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। भारत को 2070 तक नेट-ज़ीरो बनाने की दिशा में हम मिलकर काम करना चाहते हैं। ऊर्जा भंडारण, जैव-ईंधन और ग्रीन हाइड्रोजन जैसी भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं पर हमारा विशेष ध्यान रहेगा। ग्रीन हाइड्रोजन भारत के लिए वास्तव में एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा।”

डॉ. मेत्री ने इस सहयोग के अंतरराष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, “हरित ऊर्जा की दिशा में भारत द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर पूरी दुनिया की नजर है। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मिशन में ओएनजीसी ग्रीन के साथ जुड़ना आईआईएम नागपुर के लिए गर्व की बात है। अनुसंधान, नेतृत्व विकास और नीति दृष्टिकोण के माध्यम से यह सहयोग भारत की भविष्य की ऊर्जा व्यवस्था को आकार देने में सहायक होगा।”

इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत पर्यावरणीय स्थिरता और ईएसजी ढांचा, नवीकरणीय ऊर्जा का विद्युत प्रणाली में एकीकरण, कार्बन और ग्रीन क्रेडिट बाजार, ऊर्जा भंडारण, ई-मोबिलिटी नीतियां तथा नेतृत्व विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य किया जाएगा। इसमें आईआईएम नागपुर की शैक्षणिक और नीतिगत विशेषज्ञता तथा ओएनजीसी ग्रीन के क्षेत्रीय अनुभव का समन्वय किया जाएगा।

इस सहयोग के लाभ सीधे आम नागरिकों तक पहुंचने की उम्मीद है। स्वच्छ और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति, किफायती और टिकाऊ ऊर्जा विकल्प, हरित रोजगार के अवसर तथा बेहतर स्वास्थ्य और जीवन-स्तर जैसे सकारात्मक प्रभाव इस पहल से सामने आएंगे। भारत की हरित ऊर्जा प्रणाली को सशक्त बनाते हुए, आईआईएम नागपुर–ओएनजीसी ग्रीन की यह साझेदारी देश की भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं को टिकाऊ और समावेशी तरीके से पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।