आईआईएम नागपुर में SOM सम्मेलन में शोध और रेलवे में एआई की भूमिका पर हुआ मंथन

आईआईएम नागपुर में SOM सम्मेलन में शोध और रेलवे में एआई की भूमिका पर हुआ मंथन
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आईआईएम नागपुर में SOM सम्मेलन में शोध और रेलवे में एआई की भूमिका पर हुआ मंथनदिसम्बर 24, 2025

आईआईएम नागपुर में SOM सम्मेलन में

शोध और रेलवे में एआई की भूमिका पर हुआ मंथन

 

नागपुर:

 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपयोग से हम अपनी कार्यक्षमता, गति, और निर्णय क्षमता को काफी हद तक बेहतर बना सकते हैं। परंतु एआई कभी भी मानव के सीखने की प्रक्रिया, विवेक, नैतिकता और जवाबदेही का स्थान नहीं ले सकता। सोसायटी ऑफ ऑपरेशन्स मैनेजमेंट (SOM) के 28वें वार्षिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान विशेषज्ञों नें ईस बात पर मुहर लगाई।

यह सम्मेलन 19 से 21 दिसंबर के बीच भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) नागपुर में आयोजित किया गया। सम्मेलन में शिक्षा क्षेत्र में शोध और भारतीय रेलवे जैसे सार्वजनिक तंत्रों में एआई के जिम्मेदार उपयोग पर व्यापक चर्चा की गई।

इस सम्मेलन में देश-विदेश के वरिष्ठ शिक्षाविदों, उद्योग जगत के नेताओं और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया और इस बात पर विचार किया कि ज्ञान निर्माण और सार्वजनिक प्रणालियों में एआई को किस प्रकार संतुलित और जिम्मेदारी के साथ अपनाया जाए।

सम्मेलन का मुख्य आकर्षण ‘डायरेक्टर्स पैनल’ रहा। आईआईएम नागपुर के निदेशक डॉ. भीमराय मेत्री के मार्गदर्शन में आयोजित इस सत्र में शोध और अकादमिक प्रकाशनों पर एआई के प्रभाव पर चर्चा की गई। आईआईएम मुंबई के निदेशक प्रो. मनोज कुमार तिवारी इस सत्र में वर्चुअली जुड़े, जबकि एसपीजेआईएमआर मुंबई के डीन डॉ. वरुण नागराज, आईआईएम इंदौर के पूर्व निदेशक प्रो. एन. रविचंद्रन तथा टोयोटा इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्णकालिक निदेशक प्रो. टी. आर. परशुरामन ने प्रत्यक्ष रूप से सहभागिता की।

पैनल सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि जानकारी खोजने, संदर्भ एकत्र करने और लिखित सामग्री को व्यवस्थित करने जैसे कार्यों में एआई उपयोगी साधन है, लेकिन सीखने और सोचने की मूल प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डॉ. वरुण नागराज ने कहा कि शोध की शुरुआत सीखने से होती है और एआई पर अत्यधिक निर्भरता, विशेष रूप से युवा शोधकर्ताओं की निर्णय-क्षमता को प्रभावित कर सकती है। प्रो. मनोज कुमार तिवारी ने स्पष्ट किया कि एआई गति और दक्षता बढ़ा सकता है, लेकिन शोध में मानवीय जवाबदेही का कोई विकल्प नहीं है।

प्रो. एन. रविचंद्रन ने गहन अध्ययन के महत्व पर जोर देते हुए कहा कहा कि गहराई से पढ़ने से विषय की बेहतर समझ विकसित होती है। प्रो. टी. आर. परशुरामन ने बताया कि उद्योग क्षेत्र एआई का सबसे बड़ा लाभार्थी है और शोधकर्ताओं को इसे विकल्प नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली सहायक के रूप में उपयोग करना चाहिए।

सम्मेलन के औपचारिक उद्घाटन सत्र में आईआईएम नागपुर के निदेशक प्रो. भीमराय मेत्री, सोसायटी ऑफ ऑपरेशन्स मैनेजमेंट के अध्यक्ष प्रो. राहुल मराठे तथा ओएनजीसी ग्रीन के मुख्य परिचालन अधिकारी डॉ. हर्ष नुपुर जोशी ने विचार रखे। प्रो. आलोक कुमार सिंह, डीन – एग्जीक्यूटिव एजुकेशन प्रोग्राम्स, ने प्रारंभिक वक्तव्य दिया, जबकि प्रो. निकुंज कुमार जैन, चेयरपर्सन, एग्जीक्यूटिव एमबीए इन एनर्जी मैनेजमेंट, ने आभार प्रदर्शन किया। ओएनजीसी लिमिटेड के निदेशक (रणनीति एवं कॉर्पोरेट मामले) अरुणांशु सरकार ने वीडियो संदेश के माध्यम से अपने विचार साझा किए।

भारतीय रेलवे पर केंद्रित एक अलग पैनल चर्चा में भी सार्वजनिक प्रणालियों में एआई की भूमिका को लेकर समान दृष्टिकोण सामने आया। प्रो. अजिंक्य टंकसाले के संचालन में हुई इस चर्चा में मध्य रेलवे के मंडल रेल प्रबंधक विनायक गर्ग, क्रिस (CRIS) के महाप्रबंधक (इंडस्ट्रियल कंप्यूटिंग) डॉ. ज्ञानेश त्रिपाठी तथा भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के निदेशक राहुल पाचोरी शामिल हुए।

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एआई का उपयोग क्रू प्रबंधन, आरक्षण प्रणाली और संचालन योजना जैसे क्षेत्रों में सहायक हो सकता है, लेकिन निकट भविष्य में लोको पायलटों की जगह नहीं लेगा। रेल से लोगों की आवाजाही अधिक सुगम हो, सब को सही समय पर सही मदद प्राप्त हो, इन कार्यों में एआई की भूमिका अनूठी है, परंतु बिना ड्राइवर के ट्रेन संचालन की अभी तक कोई योजना नही हैं।

रविवार को तकनीकी सत्रों, शोध पत्र प्रस्तुतियों और कार्यशालाओं के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।