भारतीय प्रबंध संस्थान नागपुर में ‘उड़ान’ का आगाज़
नागपुर:
प्रबंधन विश्व के भविष्य के कर्णधारों को प्रेरित करने और उन्हें व्यावसायिक बारीकियों से रूबरू कराने के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान नागपुर में ‘उड़ान’ कार्यक्रम का शानदार आयोजन रविवार 8 फरवरी को किया गया। व्यापार और उद्यम क्षेत्र में अग्रणी ‘सी एन बी सी’ आवाज चैनल द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस कॉन्क्लेव में व्यापार, समाजसेवा और स्टार्टअप जगत की दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की। पूरे कार्यक्रम का केंद्र बिंदु संस्थान के निदेशक डॉ. भीमराया मेत्री और अनुभवी पत्रकार विपिन भट्ट के बीच हुई चर्चा रही।
कार्यक्रम की शुरुआत में अपनी बात रखते हुए डॉ. भीमराया मेत्री ने प्रबंधन के छात्रों को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में केवल बुद्धि (IQ) ही काफी नहीं है, बल्कि नेतृत्व के लिए भावनात्मक समझ (EQ) का होना भी उतना ही अनिवार्य है। उन्होंने छात्रों से सीधा संवाद करते हुए कहा, “अगर आप जीवन में कुछ बड़ा हासिल करना चाहते हैं, तो अपने ‘कंफर्ट ज़ोन’ को त्यागना होगा। जब आप खुद को अनिश्चितताओं में झोंकते हैं, तभी आपकी असली क्षमताओं का पता चलता है।”
कार्यक्रम का पहला सत्र राह से हटकर निर्णय लेनें वाले यशस्वी लोगों पर केंद्रित रहा। कंचन नौटियाल द्वारा संचालित इस चर्चा में स्लम सॉकर के संस्थापक विजय बारसे (जिनके जीवन पर ‘झुंड’ फिल्म बनी है), लेमन आइडियाज के दीपक मेनारिया और अर्लीसाइन के सीईओ शुभेंद्र सिंह ठाकुर ने अपने अनुभव साझा किए। पैनल ने विस्तार से बताया कि कैसे एक सही समय पर लिया गया एक छोटा सा निर्णय भविष्य की बड़ी सफलता की नींव रखता है।
वित्तीय प्रबंधन पर बात करते हुए यू टी आई म्यूचुअल फंड के क्षेत्रीय प्रमुख मनप्रीत सिंह गांधी ने प्रबंधन विद्यार्थियों को बाजार में अफवाहों के शोर से बचने की सलाह दी। उन्होंने ‘लक्ष्य आधारित निवेश’ पर जोर देते हुए बताया कि एक सफल प्रोफेशनल के लिए अनुशासित निवेश क्यों ज़रूरी है।
कार्यक्रम के अंतिम पड़ाव में आर.सी. प्लास्टो के निदेशक नीलेश अग्रवाल ने विपिन भट्ट के साथ एक खास ‘फायरसाइड चैट’ में हिस्सा लिया। उन्होंने प्लास्टो के फर्श से अर्श तक पहुँचने की कहानी साझा की और बताया कि कैसे कठिन परिस्थितियों में लिए गए साहसी निर्णय किसी भी बिज़नेस मॉडल को सफल बना सकते हैं।
इस आयोजन ने भारतीय प्रबंध संस्थान नागपुर के छात्रों को न केवल किताबी ज्ञान से हटकर व्यावहारिक दुनिया की झलक दिखाई, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए एक नई दिशा भी प्रदान की।
